Vishwas, Pauranik katha | Bhagwan Vishnu aur unke bhakt

   विश्वास  

 

 नारद मुनि पृथ्वीलोक और परलोक की भ्रमण हमेशा करते रहते थे । एक बार नारद मुनि पृथ्वी लोक का भ्रमण कर रहे थे तो उन्होंने देखा की एक इंसान इमली के पेड़ के नीचे बैठ कर तपस्या कर रहा था। नारद मुनि उत्सुकतावश उसके पास पहुँचे और उसे पूछा कि तुम क्या कर रहे हो? तो उस इंसान ने कहा कि मैं विष्णु भगवन के दर्शन पाने हेतु तपस्या कर रहा हूँ। 


नारद मुनि ने पूछा -क्या तुम्हे विश्वास है की वो तुम्हे दर्शन देगें? तो उसने कहा-हाँ पूरा विश्वास है वो मुझे दर्शन जरूर देंगे। 


तो नारद मुनि ने मन ही मन सोचा, ये कोई पागल है और उससे पूछा - अच्छा बता वे तुझे कब दर्शन देंगे? तो उसने कहा ये आप से बेहतर कौन बता सकता है।आप तो हर समय भगवान के पास जाते रहते है, तो जरा पूछ लीजियेगा की वो मुझे कब दर्शन देंगे। ये सुनकर नारद मुनि वहाँ से चले गए। 


एक दिन जब वे स्वर्गलोक में विष्णु भगवन से मिले तो बात - चित के दौरान नारद मुनि को पृथ्वीलोक का वो तपस्वी याद आया। नारद मुनि ने कहा - भगवान मैंने पृथ्वीलोक में एक इन्सान को इमली के पेड़ के निचे आप के दर्शन प्राप्ति हेतु तपस्या करते देखा। उसे भरोसा है कि आप उसे दर्शन जरूर देंगे। क्या आप उसे सचमुच दर्शन देंगे? भगवन ने कहा, हाँ क्यों नहीं  देंगे, जरूर देंगे। तो नारद मुनि ने पूछा की कब देंगे बतला दीजिये तो मैं उसे कह दूँगा।


भगवन ने कहा की उसे कह दीजियेगा की इमली के पेड़ में जितने पत्ते है उतने वर्षो के बाद। नारद मुनि वहाँ से चले गए। जब पृथ्वी लोक पहुँचे और उस इंसान से मिले, तो उसने पूछा-आप विष्णु भगवन से मिले? तो नारद मुनि ने कहा हाँ मिला। उस व्यक्ति ने पूछा -उन्होंने क्या कहा? नारद मुनि ने कहा की भगवान ने कहा की इमली के पेड़ में जितने पत्ते है उतने वर्षो के बाद वो तुम्हे दर्शन देंगे। 


इतना सुनते ही वो इंसान ख़ुशी से नाचने लगा। नारद मुनि ने कहा तुम पागल हो गए हो क्या? तुम्हे पता है कि इमली के पेड़ में जितने पत्ते है उतने वर्षो तक तुम जीवित रहोगे भी या नहीं? तो उस इंसान ने कहा ये मेरे सोचने का काम नहीं है। ये सब भगवान पर छोड़ दीजिये। 


अब वो जाने मुझे कितने वर्षो तक जीवित रखना है। मुझे तो बस उनके दर्शन होने तक तपस्या में लगे रहना है। 


इतने में विष्णु भगवान वहाँ प्रकट हो गए। उस तपस्वी के ख़ुशी का ठिकाना न रहा। विष्णु भगवान ने नारद मुनि से कहा देखा, आपको मुझ पर विश्वास नहीं था, पर इसे था। ये मेरी ली गई परीक्षा से नहीं घबराया तो मुझे दर्शन तो देना ही था।


 
इसे कहते है विश्वास। अपने इष्ट पर विश्वास करो तो दिल से, शुद्धता से, निःस्वार्थ, निश्छल भाव से |



हरि बोल,  हरि बोल, हरि बोल, हरि बोल, हरि बोल, हरि बोल


जय जय श्री राधे | जय जय श्री राधे |जय जय श्री राधे | जय जय श्री राधे ||


नाम महाधन है अपनौ , नहीं दूसरी सम्पति और कमानी ।


हमें औरन की परवाह नहीं , अपनी ठकुरानी श्री राधिका रानी।।


राधा दामोदर, राधा दामोदर,राधा दामोदर, राधा दामोदर, राधे |

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे |
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे | 
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे |
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे | 
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे |
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे | 
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे |
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे | 
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे |
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे | 
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे |
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे | 




नारद मुनि पृथ्वीलोक और परलोक की भ्रमण हमेशा करते रहते थे । एक बार नारद मुनि पृथ्वी लोक का भ्रमण कर रहे थे तो उन्होंने देखा की एक इंसान इमली के पेड़ के नीचे बैठ कर तपस्या कर रहा था। नारद मुनि उत्सुकतावश उसके पास पहुँचे और उसे पूछा कि तुम क्या कर रहे हो? तो उस इंसान ने कहा कि मैं विष्णु भगवन के दर्शन पाने हेतु तपस्या कर रहा हूँ। 

नारद मुनि ने पूछा -क्या तुम्हे विश्वास है की वो तुम्हे दर्शन देगें? तो उसने कहा-हाँ पूरा विश्वास है वो मुझे दर्शन जरूर देंगे। तो नारद मुनि ने मन ही मन सोचा, ये कोई पागल है और उससे पूछा - अच्छा बता वे तुझे कब दर्शन देंगे? तो उसने कहा ये आप से बेहतर कौन बता सकता है।आप तो हर समय भगवान के पास जाते रहते है, तो जरा पूछ लीजियेगा की वो मुझे कब दर्शन देंगे। ये सुनकर नारद मुनि वहाँ से चले गए। 

एक दिन जब वे स्वर्गलोक में विष्णु भगवन से मिले तो बात - चित के दौरान नारद मुनि को पृथ्वीलोक का वो तपस्वी याद आया। नारद मुनि ने कहा भगवन मैंने पृथ्वीलोक में एक इन्सान को इमली के पेड़ के निचे आप के दर्शन प्राप्ति हेतु तपस्या करते देखा। उसे भरोसा है कि आप उसे दर्शन जरूर देंगे। क्या आप उसे सचमुच दर्शन देंगे? भगवन ने कहा, हाँ क्यों नहीं  देंगे, जरूर देंगे। तो नारद मुनि ने पूछा की कब देंगे बतला दीजिये तो मैं उसे कह दूँगा।
भगवन ने कहा की उसे कह दीजियेगा की इमली के पेड़ में जितने पत्ते है उतने वर्षो के बाद। नारद मुनि वहाँ से चले गए। जब पृथ्वी लोक पहुँचे और उस इंसान से मिले, तो उसने पूछा-आप विष्णु भगवन से मिले?तो नारद मुनि ने कहा हाँ मिला। उस व्यक्ति ने पूछा -उन्होंने क्या कहा? नारद मुनि ने कहा की भगवान ने कहा की इमली के पेड़ में जितने पत्ते है उतने वर्षो के बाद वो तुम्हे दर्शन देंगे। 
इतना सुनते ही वो इंसान ख़ुशी से नाचने लगा।नारद मुनि ने कहा तुम पागल हो गए हो क्या? तुम्हे पता है कि इमली के पेड़ में जितने पत्ते है उतने वर्षो तक तुम जीवित रहोगे भी या नहीं? तो उस इंसान ने कहा ये मेरे सोचने का काम नहीं है। ये सब भगवान पर छोड़ दीजिये। 
अब वो जाने मुझे कितने वर्षो तव से |क जीवित रखना है। मुझे तो बस उनके दर्शन होने तक तपस्या में लगे रहना है। 
इतने में विष्णु भगवान वहाँ प्रकट हो गए। उस तपस्वी के ख़ुशी का ठिकाना न रहा। विष्णु भगवान ने नारद मुनि से कहा देखा, आपको मुझ पर विश्वास नहीं था, पर इसे था। ये मेरी ली गई परीक्षा से नहीं घबराया तो मुझे दर्शन तो देना ही था।
 
इसे कहते है विश्वास। अपने इष्ट पर विश्वास करो तो दिल से, शुद्धता से, निःस्वार्थ, निश्छल भा









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