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सीखो कविता --- कवि श्री नाथ सिंह

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  सीखो कविता  कवि श्री नाथ सिंह  फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना। तरु की झुकी डालियों से नित, सीखो शीश झुकाना! सीख हवा के झोकों से लो,  कोमल भाव बहाना ! दूध और पानी से सीखो, मिलना और मिलाना! सूरज की किरणों से सीखो, जगना और जगाना! लता और पेड़ों से सीखो, सबको गले लगाना! वर्षा की बूँदों से सीखो, सबसे प्रेम बढ़ाना! मेहँदी से सीखो सब ही पर, अपना रंग चढ़ाना!   दीपक से सीखो, जितना हो सके अँधेरा हरना! पृथ्वी से सीखो प्राणी की सच्ची सेवा करना! मछली से सीखो स्वदेश के लिए तड़पकर मरना! पतझड़ के पेड़ों से सीखो, दुख में धीरज धरना! जलधारा से सीखो, आगे जीवन पथ पर बढ़ना! और धुएँ से सीखो हरदम ऊँचे ही पर चढ़ना! श्री नाथ सिंह   

जय-जय भै‍रवि असुर भयाउनि | Jai jai bhairavi asur bhayawni | विद्यापति गीत | Vidyapati geet | माँ दुर्गा गीत

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जय-जय भै‍रवि असुर भयाउनि  Jai jai bhairavi asur bhayawni   विद्यापति  माँ दुर्गा  गीत Sri Vidyapatiji Maa Durga geet  माँ दुर्गा गीत  जय-जय भै‍रवि असुर भयाउनि  Jai jai bhairavi asur bhayawni माँ दुर्गा गीत  विद्यापति गीत   Sri Vidyapatiji    विद्यापति जी  मैथिली और संस्कृत के कवि, संगीतकार, लेखक, दरबारी और राज पुरोहित थे | उन्हें 'मैथिल कवि कोकिल' के नाम से जाना जाता है।  जय-जय भै‍रवि असुर भयाउनि पशुपति भामिनी माया सहज सुमति वर दियउ गोसाउनि अनुगति गति तुअ पाया | वासर रैनि सबासन शोभित चरण चन्‍द्रमणि चूड़ा कतओक दैत्‍य मारि मुख मेलल कतओ उगिलि कएल कूड़ा | सामर बरन नयन अनुरंजित जलद जोग फुलकोका कट-कट विकट ओठ पुट पांडरि लिधुर फेन उठ फोंका | Anant chaturdasi घन-घन-घनय घुंघरू कत बाजय हन-हन कर तुअ काता विद्यापति कवि तुअ पद सेवक पुत्र बिसरू जनि माता | JAI JAI BHAIRAVI BY Sharda Sinha जय-जय भै‍रवि असुर भयाउनि | Jai jai bhairavi asur bhayawni | विद्यापति गीत | Vidyapati geet  जय-जय भै‍रवि असुर भयाउनि | Jai jai bhairavi a...