ललिता सहस्रनाम Shree Lalitha Sahasranama Stotram ललिता सहस्रनाम ‘ब्रह्माण्ड पुराण’ से लिया गया है। ललिता सहस्त्रनाम तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है – पूर्व भाग – इसमें सहस्रनाम की उत्पत्ति के बारे में बताया है। स्तोत्र – इसमें देवी माँ के 1000 नाम आते हैं। उत्तर भाग – इसमें फलश्रुति या सहस्रनाम पठन के लाभ बताए गए है। यह भगवान हयग्रीव (महाविष्णु के अवतार) ने ऋषि अगस्त्य को सिखाया। ललिता सहस्रनाम क्या है? ललिता आत्मा की उल्लासपूर्ण, क्रियाशील और प्रकाशमय अभिव्यक्ति है। मुक्त चेतना जिसमें कोई राग द्वेष नहीं, जो आत्मस्थित है वह स्वतः ही उल्लासपूर्ण, उत्साह से भरी, खिली हुई होती है। यह ललिताकाश है। ललिता सहस्रनाम में हम देवी माँ के एक हजार नाम जपते हैं। नाम का अपना एक महत्त्व होता है। यदि हम चन्दन के पेड़ को याद करते हैं तो हम उसके इत्र की स्मृति को साथ ले जाते हैं। सहस्रनाम में देवी के प्रत्येक नाम से देवी का कोई गुण या विशेषता बताई जाती है। ललिता सहस्रनाम के पाठ से क्या लाभ होता है? (Lalitha Sahasranama benefits) हमारे जीवन के विभिन्न पड़ावों में, बालपन से कि...