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आदि देव महादेव हे दयानिधे !

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   आदि देव महादेव हे दयानिधे ! नीलकण्ठ पार्वतीश हे कृपानिधे ! आदि देव महादेव हे दयानिधे !! नमस्तेस्तु विश्वेशर त्र्यम्बकेश गङ्गाधर  नन्दिकेश भालचन्द्र हे पशुपते ! आदि देव महादेव हे दयानिधे !! कृपा करो दुःख हरो हर्ष भरो हे शंकर ! ह्रदय कञ्ज सदा बसो हे शिव करुणानिधे ! आदि देव महादेव हे दयानिधे  आदि देव महादेव हे दयानिधे !! 

✨ Positive Vibes ✨

  ✨ Positive Vibes ✨ कोई सबसे अपना आपसे रूठ जाए, तो आप बस एक काम करना… उसे याद करके मन ही मन ये कहना: 💖 "इस दुनिया में तुम मुझे सबसे प्यारे हो" इस बात को गहरी सांस लेकर 45 बार महसूस करते हुए कहो… देखना, वो आपसे ज्यादा देर तक रूठा नहीं रह पाएगा, और खुद चलकर आपके पास आ जाएगा। 🌸 प्यार, विश्वास और सकारात्मक सोच में बहुत ताकत होती है। 🌸 #PositiveVibes #Love #GoodThoughts #StayPositive  #GoodThoughts #Motivation #HindiQuotes

ललिता सहस्रनाम | Shree Lalitha Sahasranama Stotram in Hindi

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   ललिता सहस्रनाम Shree Lalitha Sahasranama Stotram  ललिता सहस्रनाम ‘ब्रह्माण्ड पुराण’ से लिया गया है।  ललिता सहस्त्रनाम तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है – पूर्व भाग – इसमें सहस्रनाम की उत्पत्ति के बारे में बताया है। स्तोत्र – इसमें देवी माँ के 1000 नाम आते हैं। उत्तर भाग – इसमें फलश्रुति या सहस्रनाम पठन के लाभ बताए गए है। यह भगवान हयग्रीव (महाविष्णु के अवतार) ने ऋषि अगस्त्य को सिखाया। ललिता सहस्रनाम क्या है? ललिता आत्मा की उल्लासपूर्ण, क्रियाशील और प्रकाशमय अभिव्यक्ति है। मुक्त चेतना जिसमें कोई राग द्वेष नहीं, जो आत्मस्थित है वह स्वतः ही उल्लासपूर्ण, उत्साह से भरी, खिली हुई होती है। यह ललिताकाश है। ललिता सहस्रनाम में हम देवी माँ के एक हजार नाम जपते हैं। नाम का अपना एक महत्त्व होता है। यदि हम चन्दन के पेड़ को याद करते हैं तो हम उसके इत्र की स्मृति को साथ ले जाते हैं। सहस्रनाम में देवी के प्रत्येक नाम से देवी का कोई गुण या विशेषता बताई जाती है। ललिता सहस्रनाम के पाठ से क्या लाभ होता है? (Lalitha Sahasranama benefits) हमारे जीवन के विभिन्न पड़ावों में, बालपन से कि...

श्री गुरु पादुका स्तोत्रम्, Namoh Namah Sri Guru Padukabhyam

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 ॥ श्री गुरु पादुका स्तोत्रम् ॥ अनंत-संसार समुद्र-तार नौकायिताभ्यां गुरुभक्तिदाभ्याम् । वैराग्य साम्राज्यद पूजनाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥1॥ कवित्व वाराशिनिशाकराभ्यां दौर्भाग्यदावांबुदमालिकाभ्याम् । दूरिकृतानम्र विपत्ततिभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥2॥ नता ययोः श्रीपतितां समीयुः कदाचिद-प्याशु दरिद्रवर्याः । मूकाश्च वाचस्पतितां हि ताभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥3॥ नालीकनीकाश पदाहृताभ्यां नानाविमोहादि-निवारिकाभ्यां । नमज्जनाभीष्टततिप्रदाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥4॥ नृपालि मौलिव्रजरत्नकांति सरिद्विराजत् झषकन्यकाभ्यां । नृपत्वदाभ्यां नतलोक पंक्ते: नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥5॥ पापांधकारार्क परंपराभ्यां तापत्रयाहींद्र खगेश्र्वराभ्यां । जाड्याब्धि संशोषण वाडवाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥6॥ शमादिषट्क प्रदवैभवाभ्यां समाधिदान व्रतदीक्षिताभ्यां । रमाधवांध्रिस्थिरभक्तिदाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥7॥ स्वार्चापराणां अखिलेष्टदाभ्यां स्वाहासहायाक्षधुरंधराभ्यां । स्वांताच्छभावप्रदपूजनाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥8॥ Maithili Bhagwati geet...

Bhagwati geet | मैथिली भगवती गीत | Maithili Bhagwati geet| Durga geet | दुर्गा गीत

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Bhagwati geet  मैथिली भगवती गीत  Maithili Bhagwati geet  Durga geet  दुर्गा गीत  त्रिपुर सुंदरी माँ    दियो भक्ति के दान हे अम्बे,हमें जइबे कता जगदम्बे |   दियो भक्ति के दान हे अम्बे,हमें जइबे कता जगदम्बे ||   जेकर पुत्र परम अज्ञानी,ओकर माता छै अम्बे भवानी |  जेकर पुत्र परम अज्ञानी,ओकर माता छै अम्बे भवानी |  दियो दियो सहारा हे अम्बे,हमें जैबे कता जगदम्बे || दियो दियो  सहारा हे अम्बे,हमें जैबे कता जगदम्बे ||  दियो भक्ति के दान हे अम्बे,हमें जइबे कता जगदम्बे |   दियो भक्ति के दान हे अम्बे,हमें जइबे कता जगदम्बे | पुत्र गलती अनेको करइ  छै,ओकर माता नै मन में धरै छै |  पुत्र गलती अनेको करइ छै,ओकर माता नै मन में धरै छै |   दियो दियो सहारा हे अम्बे,हमें जैबे कता जगदम्बे | दियो दियो सहारा हे अम्बे,हमें जैबे कता जगदम्बे ||  हमर नैया परल मझधार में,हमरा शक्ति नय छै कमर में| हमर नैया परल मझधार में,हमरा शक्ति नय छै कमर में| दियो दियो सहारा हे अम्बे,हमें जैबे कता जगदम्बे | दियो दियो ...