नवरात्री \विजयादशमी

नवरात्री 
दशहरा  
विजयादशमी 
जय माँ अम्बे भवानी 





नवरात्री का पर्व  एक ऐसा पर्व है जिसे पूरे भारत वर्ष में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है |यह पर्व अश्विन मास के शुक्लपक्ष की पहली तिथि से नवमी तिथि तक चलती है | सबसे पहले दिन लोग संकल्प लेकर कलश स्थापित करते है और पूरे तन मन से और बहुत ही श्रद्धा से नौ दिनों तक माँ की सप्तशती का पाठ करते है |कुछ लोग इन नौ दिनों मे रामायण भी पढ़ते है | कुछ लोग दुर्गा सप्तशती को तीन भागो मे बाँट कर पढ़ते है तो कुछ लोग पूरा सप्तशती के पाठ को हर रोज पढ़ते है - जिसको जैसा उचित लगता है करते है |परन्तु पूरा देश नव रात्रि के माहौल में सराबोर रहता है इन नौ दिनों तक | कुछ लोग समूह मे घर-घर जाकर गाना-बजाना भी करते है और सप्तशती के पाठ को कीर्तन की तरह गाते है |सब कुछ इन नौ दिनों तक बहुत ही खूबसूरती से होता है | ऐसा लगता है मनो माँ हमसब के बिच ही है | दुर्गा सप्तशती की पुस्तक मे माँ  का समय -समय पर प्रकट होने की जो कथा है वो हम सब को निर्भय बनती है |वो हमें समझाती है कि यदि सच्चे दिल से और पूरे विश्वास से  माँ को पुकारें तो माँ हमे बहुत  विकट परिस्थिति से भी सरलता से बाहर निकलने का रास्ता दिखला देतीं हैं |  वैसे तो हम सभी जानते ही हैं  कि श्री राम ने भी माँ सीता को लंका से वापस लाने के लिए माँ की स्तुति की थी | माँ ने उन्हे विजयी होने का वरदान दिया था |पता है दोस्तों महिषासुर राक्षश के प्रकोप के जरुरत से ज्यादा बढ़ जाने पर जब सभी भयभीत होने लगे तो ब्रह्मा ,विष्णु ,महेश के क्रोध के तेज पुञ्ज ने एक नारी का स्वरुप लिया और उस नारी को सजाने के लिए जल, पृथ्वी और आकाश मे रहने वाले सारे देवता जिनका जो प्रमुख अस्त्र, शस्त्र, वस्त्र- आभूषण आदि समर्पित कर सुसज्जित किया | तब माँ का ये स्वरुप इतना प्रचंड हुआ कि उनके हुँकार शब्द ने पूरी पृथ्वी और आकाश को हिला कर रख दिया |देवी माँ ने महिषासुर और उसकी सारी प्रजाति का मर्दन कर सबों को निर्भय किया | माँ का अलग - अलग समय मे अलग - अलग उद्देश्य हेतु प्राकट्य होता रहा है और होता रहेगा |उनके पास सभी शक्तियाँ है इस कारण वो शक्ति की देवी भी है|अष्टमी को माँ के जागरण का दिन होता है | इस दिन को भी बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है | नौवे दिन कन्या पूजन होता है और पूरे भारत मे इसी दिन अस्त्र - शस्त्र की पूजा को आयुध पूजा के रूप मे मनाया जाता है|साथ ही सरस्वती पूजा भी पश्चिम और दक्षिण भारत मे इसी दिन मनाई जाती है |कन्या पूजन और हवन  के बाद ही नवरात्री समाप्त हो जाती है | दसवें  दिन रावण के दहन के  साथ ही  दशहरा समाप्त होता है | ऐसी मान्यता है की श्री राम  ने इसी दिन रावण का वध किया था | इस कारण इस दिन को असत्य पर सत्य की विजय के रूप मे हर वर्ष मनाया जाता है |


 हम सब को भी माँ  हमेशा अपने आँचल मे समेटे रहें यही मन मे इच्छा लिए हम सबों को भी माँ की आराधना पूरे तन मन से करनी चाहिए | ये नव दिनों का उत्सव तो है ही जो पूरा देश अपने अपने तरीके से हर्ष और उल्लास से मनाता है | परन्तु यदि सच्चे दिल से माँ की हर रोज आराधना की जाए तो मैं विश्वास के साथ कहती हूँ माँ हमेशा हमें हर कष्ट से बाहर निकलने का रास्ता दिखला देती है | अपनी आँचल की छाया कभी हमारे सिर से नहीं हटाती | कुछ लोग नौ दिन फलाहार करते है तो कुछ लोग पूजा प्रार्थना ख़त्म कर सेंधा नमक का बना खाना खाते है | कोई भी काम अपने शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करना ठीक होता है क्यूंकि इन नौ दिनों मे बाकी का कोई काम रुकता नहीं है | किसी के कहने पर कोई कदम उठाना बिलकुल सही नहीं होता | सबसे जरुरी होता है हम जिसकी आराधना कर रहे है उसके प्रति सच्चाई से जुड़े | पूरे मन से पूरे ध्यान से जुड़े | किसी को हमारे कारण कष्ट हो जाए तो पूजा का कोई मतलब ही नहीं होता |
नवरात्री के दिन तो श्रद्धा और भक्ति मे डूबे होते है पर रातें नृत्य और संगीत से सराबोर होती है | जगह जगह मस्ती मे झूमते बच्चे-बड़े बहुत ही सुन्दर रगबिरंगी कपड़े पहनकर गरबा और डंडियाँ नृत्य करते है | इसके लिए सभी लोग ग्रुप मे एक महीने से अभ्यास भी करते रहते है |



और प्रत्येक रात्रि को पूरे जोश से अपना - अपना जलवा दिखलाते है | बहुत ही आनंद से भरा होता है ये नौ दिन | असली पर्व तो  इसे ही कहा जाता है जिसे श्रद्धा,जोश और खुशहाली के साथ पूरा देश मनाऐं |
नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएँ !!!!

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