ब्रह्ममुहूर्त की प्रातःकालीन दिनचर्या | ब्रह्ममुहूर्त में उठने के संस्कार | Brahmamuhurat Sanskar

  

ब्रह्ममुहूर्त संस्कार 

Morning Sanskar 

प्रातःकाल उठने के संस्कार









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ब्रह्ममुहूर्त की प्रातःकालीन दिनचर्या

ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 30–45 मिनट पूर्व) को शास्त्रों में जागरण, ध्यान एवं आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। इस समय मन, बुद्धि एवं वातावरण अत्यंत शांत और सात्त्विक होते हैं।

1. ब्रह्ममुहूर्त में जागरण

प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में जागते समय तुरंत आँखें न खोलें। पहले शांत भाव से करवट लेकर उठें और दोनों हथेलियों से अपनी बंद आँखों को ढक लें। फिर धीरे-धीरे आँखें खोलें तथा अपनी हथेलियों का प्रेमपूर्वक दर्शन करें। इसके साथ निम्न श्लोक का स्मरण करें—

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥

भावार्थ: हाथों के अग्रभाग में माता लक्ष्मी, मध्य भाग में माता सरस्वती तथा मूल भाग में भगवान गोविन्द का निवास है। इसलिए प्रातःकाल अपने हाथों का दर्शन करना शुभ एवं मंगलकारी माना गया है।

2. पृथ्वी माता से क्षमा-प्रार्थना

बिस्तर से उतरकर पृथ्वी पर पैर रखने से पहले धरती माता को प्रणाम करें और उनसे क्षमा याचना करें—

समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डिते।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥

भावार्थ: हे देवी! जो समुद्र रूपी वस्त्र धारण करती हैं, जिनके पर्वत स्तनों के समान शोभायमान हैं और जो भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं, आपको मेरा प्रणाम। मेरे पैरों के स्पर्श को क्षमा करें।

3. ईश्वर का स्मरण

पृथ्वी पर पैर रखने के बाद भगवान का स्मरण करें, अपने माता-पिता एवं गुरु को मन ही मन प्रणाम करें तथा दिन के प्रत्येक कार्य को शुभ, सात्त्विक एवं लोककल्याणकारी बनाने का संकल्प लें।

इस प्रकार ब्रह्ममुहूर्त में श्रद्धा, शांति और कृतज्ञता के साथ दिन का प्रारंभ करने से शरीर, मन और आत्मा में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा सम्पूर्ण दिन मंगलमय एवं सफल बनता है।

राम एक चरित्र एक पात्र 

भए प्रगट कृपाला दिनदयाला 

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